नसीमखान ,सांची से .लाइव खबर इंडिया मप्र छग
सांची,,जैसे-जैसे त्यौहारों का आगाज होता है, वैसे-वैसे शराब माफियाओं की सक्रियता चरम पर पहुंच जाती है। इस दौरान पुलिस जहां त्योहारों को शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने की जद्दोजहद में लगी रहती है, वहीं आबकारी विभाग की शिथिलता से शराब माफियाओं के हौसले बुलंद होते दिखाई देते हैं। इससे सरकार और प्रशासन द्वारा चलाया जा रहा नशा मुक्ति अभियान खोखला साबित हो रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सांची, जिसे विश्व को शांति का संदेश देने वाला स्थल माना जाता है, वहां त्योहारों के समय शराब का अवैध कारोबार खुलेआम फलने-फूलने लगता है। प्रशासन समयबद्ध बिक्री के आदेश तो जारी करता है, लेकिन वह केवल कागजों तक सीमित रह जाते हैं। इतना ही नहीं, जब-जब शासन प्रतिबंध लगाता है, विभागीय मिलीभगत से माफिया पिछला दरवाजा खोलने में सफल हो जाते हैं।
त्योहारों की खुशियां शराब की भेंट।
त्योहारों पर शराब दुकानों में मेले जैसी भीड़ उमड़ पड़ती है, जहां अव्यवस्था और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। बौद्ध अनुयायियों का पवित्र तीर्थ स्थल कहे जाने वाले सांची की पवित्रता भी इस दौरान दागदार होती है। शराबखोरी से सबसे अधिक परेशानी महिलाओं को उठानी पड़ती है, जिन्हें असुरक्षित माहौल का सामना करना पड़ता है।
नशा मुक्ति अभियान खोखला साबित।
नशे के विरुद्ध बड़े स्तर पर चलाए गए जागरूकता अभियान और शपथ ग्रहण कार्यक्रमों के बावजूद, शराब माफियाओं ने पूरे अभियान को पलीता लगा दिया है। गांव-गांव और घर-घर तक शराब की सप्लाई पहुंच रही है। सूत्रों के अनुसार सरकार को शराब कारोबार से करोड़ों रुपये का राजस्व मिलता है, वहीं विभागीय अधिकारियों की भी समानांतर आय होती रहती है। यही कारण है कि शासन-प्रशासन की नशा मुक्ति मुहिम ध्वस्त हो रही है।
नागरिकों की आवाज बुलंद हो चली।
लगातार बढ़ते शराब कारोबार से आमजन में रोष व्याप्त है। नागरिकों ने प्रशासन से शराब माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई कर सांची की पवित्रता और त्योहारों की खुशियों को सुरक्षित रखने की मांग उठाई है।






