सांची में बौद्ध वार्षिकोत्सव की तैयारियां शुरू, महाबोधि सोसायटी ने संभाली कमान।भगवान बुद्ध के परम शिष्यों की पावन अस्थियों के दर्शनार्थ देश-विदेश से उमड़ेंगे श्रद्धालु, सुरक्षा व सुविधाओं की तैयारी जोरों पर।

नसीमखान सांची
सांची,,, प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुरूप इस वर्ष भी सांची में बौद्ध वार्षिकोत्सव की तैयारियां जोरशोर से शुरू हो चुकी हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए महाबोधि सोसायटी ने पूरी तरह कमर कस ली है और आयोजन स्थल पर तैयारी प्रारंभ कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार इस वर्ष का वार्षिकोत्सव नवंबर माह के अंतिम रविवार को ऐतिहासिक स्तूप परिसर में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान भगवान बुद्ध के परम शिष्य महामोग्गलान और सारिपुत्र की पावन अस्थियों को बौद्ध मंदिर में श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रखा जाएगा तथा पारंपरिक रूप से स्तूप परिसर की परिक्रमा कराई जाएगी।
इस अवसर पर देश-विदेश से हजारों की संख्या में बौद्ध अनुयायी सांची पहुंचते हैं। उनकी सुविधा के लिए महाबोधि सोसायटी द्वारा ठहरने, भोजन एवं पेयजल की समुचित व्यवस्था की जा रही है। वहीं नगर परिषद प्रशासन द्वारा साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और पार्किंग की बेहतर तैयारियां की जा रही हैं। नगर के प्रमुख मार्गों पर यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष सतर्कता बरतनी शुरू कर दी गई है।
वार्षिकोत्सव के दौरान आसपास और दूरदराज से आने वाले व्यापारी अपने अस्थायी प्रतिष्ठान लगाते हैं। नगर परिषद की ओर से इन दुकानदारों को निर्धारित स्थान उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कई सामाजिक संस्थाएं निशुल्क जलपान व भोजन की व्यवस्था में सहयोग कर रही हैं।
विधुत विभाग द्वारा पूरे आयोजन स्थल पर निर्बाध बिजली आपूर्ति के इंतज़ाम किए जा रहे हैं। वहीं, पुरातत्व विभाग की ओर से इस अवसर पर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सांची के प्रमुख स्मारकों का एक दिन के लिए निशुल्क दर्शन घोषित किया जाता है।
महाबोधि सोसायटी के प्रभारी भंते जी ने बताया कि — “सांची का यह वार्षिकोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विश्व शांति, सद्भावना और करुणा का संदेश देने वाला पर्व है। हर वर्ष की तरह इस बार भी देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत व उनकी सुविधा हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।”
सांची का यह वार्षिकोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों के लिए श्रद्धा और समरसता का अद्वितीय संगम भी बन जाता है।

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