नसीमखान सांची
सांची,,,
इंदौर में दूषित पेयजल से सैकड़ों लोगों के प्रभावित होने की घटना के बाद शासन-प्रशासन पूरी तरह सतर्क मोड में आ गया है। जिला कलेक्टर द्वारा जिलेभर में पेयजल पाइपलाइनों की जांच व सुधार के स्पष्ट निर्देश भी जारी किए गए हैं, लेकिन ऐतिहासिक एवं विश्वविख्यात स्थल सांची में इन आदेशों का असर अभी तक जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है।
नगर के अधिकांश क्षेत्रों में आज भी पेयजल की पाइपलाइन गंदगी भरी सीवर एवं नालियों से होकर गुजर रही है। परिणामस्वरूप नागरिकों को बदबूदार और संदिग्ध गुणवत्ता का पानी घरों तक पहुंच रहा है। यह समस्या कोई नई नहीं है—वर्षों से स्थानीय नागरिक दूषित पानी और गंदगी की शिकायतें नगर परिषद एवं प्रशासन तक पहुंचाते आ रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।
जानकारी के अनुसार, नालियों के भीतर बिछी पाइपलाइनों में जगह-जगह लीकेज है, जिससे सीवर का गंदा पानी पेयजल लाइन में मिलने का खतरा लगातार बना हुआ है। इससे क्षेत्र में गंभीर बीमारियों की आशंका भी बढ़ गई है। स्थिति और गंभीर तब हो जाती है जब नालियों पर अतिक्रमण कर उन्हें ढक दिया गया है, जिसके नीचे से गुजर रही पाइपलाइनों तक पहुंच भी मुश्किल हो गई है।
हालांकि कलेक्टर द्वारा पेयजल लाइनों को सीवर से अलग करने और नागरिकों को सुरक्षित व स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन सांची में अब तक इन आदेशों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो सका है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना के इंतजार में है?
इस संबंध में नगर परिषद सांची के सीएमओ रामलाल कुशवाहा का कहना है—
“गंदगी भरी नालियों से गुजर रही पाइपलाइनों का निरीक्षण किया जा रहा है। जहां-जहां पाइपलाइन नालियों में डली हैं, उन्हें शीघ्र हटाया जाएगा। साथ ही लीकेज की मरम्मत कराई जा रही है। इस मामले में नगर परिषद पूरी तरह गंभीर है।”
अब देखना यह है कि प्रशासन की गंभीरता कागजों से निकलकर ज़मीन पर कब उतरती है, क्योंकि स्वच्छ पेयजल नागरिकों का अधिकार है।






