नसीमखान सांची
सांची,,विश्व धरोहर घोषित ऐतिहासिक नगरी सांची में बिजली की आंखमिचौली थमने का नाम नहीं ले रही है। विकास और व्यवस्थाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। अनियमित बिजली आपूर्ति के चलते नगरवासी भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं, वहीं जिम्मेदार अधिकारी अपनी जवाबदेही से मुंह फेरते दिखाई दे रहे हैं।
जानकारी के अनुसार सांची जैसे अंतरराष्ट्रीय पहचान वाले स्थल पर बिजली व्यवस्था कब आए और कब जाए, इसका कोई भरोसा नहीं रहता। वर्ष भर बिजली मरम्मत कार्य के नाम पर खुदाई और सुधार की बातें की जाती हैं, बावजूद इसके व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही। विशेषकर जब नगर में कोई सांस्कृतिक या धार्मिक आयोजन होता है, तब तो घंटों बिजली गायब रहना आम बात हो जाती है।
इन दिनों नगर में वार्षिक ऐतिहासिक रामलीला का आयोजन चल रहा है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंच रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद बिजली व्यवस्था चरमराई हुई है। कड़ाके की ठंड के मौसम में भी घंटों बिजली गुल रहना मंडल अधिकारियों की लापरवाही को उजागर करता है।
बिजली गुल होने से जलप्रदाय व्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाती है। वहीं सरकारी और निजी संस्थानों में लागू ऑनलाइन एवं कंप्यूटरीकृत कार्यप्रणाली भी बिजली पर निर्भर है, ऐसे में बिजली बाधित होते ही पूरा तंत्र ठहर जाता है। उपभोक्ताओं पर बिजली बिलों का दबाव लगातार बढ़ रहा है, जबकि स्मार्ट मीटर लगाने की जल्दबाजी के बीच मूल व्यवस्था सुधारने पर कोई ठोस ध्यान नहीं दिया जा रहा।
बिजली अव्यवस्था का सीधा असर देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों पर भी पड़ रहा है, जिससे न केवल नगर बल्कि प्रदेश और देश की छवि को भी नुकसान पहुंच रहा है। स्थानीय लोगों में इसे लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है, लेकिन वरिष्ठ अधिकारी मानो पूरी तरह बेफिक्र होकर इस ऐतिहासिक स्थल की व्यवस्था भगवान भरोसे छोड़ चुके हैं। अधिकारी हमेशा मरम्मत की बात कहकर पल्लू झाडते दिखाई दे जाते है।
विश्व धरोहर सांची में बिजली जैसी बुनियादी सुविधा की बदहाली, जिम्मेदारों के दावों और हकीकत के बीच की खाई को साफ उजागर कर रही है






