नसीमखान सांची
सांची,,,
सूत्रों के अनुसार सांची जनपद पंचायत अंतर्गत तत्कालीन मनरेगा योजना के तहत ग्रामीणों को रोजगार देने और तालाब निर्माण के नाम पर शासन की लाखों–करोड़ों रुपये की राशि खर्च होना दर्शाई गई, लेकिन कई स्थानों पर ये कार्य आज भी केवल कागजों तक ही सीमित नजर आते हैं।
सूत्र बताते हैं कि योजना के अंतर्गत जिन तालाबों और अन्य निर्माण कार्यों का भुगतान दर्शाया गया, वे कई जगहों पर धरातल पर अस्तित्व में ही नहीं हैं, जबकि कुछ स्थानों पर कार्य की गुणवत्ता इतनी कमजोर रही कि निर्माण प्रारंभिक अवस्था में ही समाप्त हो गया।
यह भी चर्चा में रहा है कि मजदूरों से कार्य कराने के बजाय मशीनों के उपयोग से काम कराए जाने की शिकायतें सामने आती रहीं, जिससे योजना का मूल उद्देश्य ही प्रभावित हुआ। सूत्रों का कहना है कि कई मामलों में तकनीकी माप और स्वीकृति की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े होते हैं, क्योंकि नियमानुसार माप उपरांत ही भुगतान संभव होता है।
हालांकि पूर्व में कुछ पंचायतों में अनियमितताओं के मामलों में कार्रवाई हुई और कुछ सचिव व रोजगार सहायकों पर निलंबन भी हुआ, लेकिन सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई प्रतीकात्मक बनकर रह गई, जबकि निगरानी और तकनीकी जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी सवालों से बाहर रहे।
सूत्रों का यह भी कहना है कि यदि सांची जनपद पंचायत में वर्षों से हुए मनरेगा निर्माण कार्यों की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो कई वर्षों से जमे जिम्मेदारों की भूमिका उजागर हो सकती है। योजना का नाम भले ही अब बदल दिया गया हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि कार्यप्रणाली में बदलाव अभी भी प्रतीक्षित है।






