आवारा सांडों का आतंक: कब लगेगा अंकुश, कब मिलेगा नागरिकों को भय से छुटकारासांची सहित क्षेत्र में सड़कों, चौराहों और खेतों तक फैलता खतरा—प्रशासनिक चुप्पी पर उठते सवाल।

नसीमखान सांची
सांची,,,
नगर सहित पूरे क्षेत्र में आवारा पशुओं, विशेषकर खतरनाक सांडों का जमावड़ा अब आम दृश्य बन चुका है। सड़कों, चौराहों, गलियों और सार्वजनिक स्थलों पर इनके खुलेआम घूमने से आमजन में भय का माहौल है, लेकिन इनसे निजात दिलाने को लेकर प्रशासन की चुप्पी चिंताजनक बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार इन दिनों आवारा पशुओं का झुंड नगर के प्रमुख चौराहों और मार्गों पर डेरा डाले हुए है। समस्या तब और गंभीर हो जाती है जब इन झुंडों में शामिल सांड आपस में भिड़ जाते हैं। ऐसी घटनाओं में कई बार वाहन उनकी चपेट में आ जाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती है। पूर्व में सांडों के हमलों व टक्करों से कई लोग चोटिल भी हो चुके हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग भी इस समस्या से अछूता नहीं है। तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर घायल अवस्था में तड़पते पशु आए दिन देखे जा सकते हैं। नगर परिषद के कर्मचारी घायल पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का प्रयास तो करते हैं, लेकिन यह केवल तात्कालिक समाधान बनकर रह गया है। स्थायी व्यवस्था के अभाव में प्रशासन पूरी तरह विफल दिखाई दे रहा है।
विडंबना यह है कि जब किसी वीआईपी काफिले का आवागमन होता है, तब पुलिस प्रशासन तत्काल सक्रिय होकर पशुओं को सड़क से हटाता नजर आता है, लेकिन आम नागरिकों की सुरक्षा के प्रति यही तत्परता कहीं दिखाई नहीं देती।
सरकार द्वारा लाखों रुपये की लागत से निर्मित गौशालाएं भी इस समस्या का समाधान नहीं बन सकी हैं। आवारा पशु सड़कों पर ही भटकते नजर आते हैं, जिससे इन गौशालाओं की उपयोगिता और खर्च की सार्थकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दूसरी ओर, किसान वर्ग इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित है। सालभर की मेहनत से तैयार की गई फसलों की रक्षा के लिए किसानों को दिन-रात खेतों में पहरा देना पड़ रहा है। गर्मी, ठंड और बारिश की परवाह किए बिना किसान अपनी उपज बचाने में जुटे रहते हैं, फिर भी आवारा पशुओं के झुंड खेतों में घुसकर फसलों को उजाड़ देते हैं। मजबूरन किसानों को पशुओं को खेतों से दूर खदेड़ते देखा जाता है।
यह भी सत्य है कि इनमें से कई पशु वास्तव में आवारा नहीं, बल्कि पालतू हैं, जिन्हें पशु मालिक दूध दोहने के बाद भगवान भरोसे सड़कों पर छोड़ देते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो ये पशु सड़कों पर ही जमघट लगाकर बैठ जाते हैं, जिससे यातायात बाधित होता है। प्रशासन द्वारा दी गई चेतावनियों का भी पशु मालिकों पर कोई खास असर नहीं पड़ा है।
तब यह पशु कहीं घायल अवस्था में तड़पते हुए, तो कहीं दुर्घटनाओं का शिकार होकर दम तोड़ते हुएदिखाई दे जाते है
अब सवाल यह है कि प्रशासन कब जागेगा और कब आमजन, किसान व राहगीरों को इस भय से मुक्ति मिलेगी?
जब तक आवारा पशुओं पर ठोस नीति और सख़्त अमल नहीं होगा, तब तक हर सड़क, हर चौराहा और हर खेत एक संभावित समस्या बना रहेगा।

  • editornaseem

    Related Posts

    सांची के बेसहारों को मिला सहारा, ‘अपना घर आश्रम’ ने बढ़ाया मानवीय सहयोग का हाथ

    नसीमखान सांची, रायसेन परिवार और परिस्थितियों से उपेक्षित लोगों को सहमति के साथ आश्रम ले जाकर रहने, भोजन और उपचार की व्यवस्था का भरोसासांची,,,नगर में ऐसे अनेक लोग हैं जो…

    पांव से मोहताज, फिर भी योग के प्रति उत्साह कम नहीं — पूर्व पार्षद ने घर पर किया योगाभ्यास।घुटनों की बीमारी के बावजूद अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर दिया स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश

    नसीमखान सांची, रायसेनसांची,,,नगर के पूर्व पार्षद रतन लाल जायसवाल पिछले लगभग एक वर्ष से घुटनों की बीमारी से पीड़ित होने के कारण घर पर आराम कर रहे हैं। बावजूद इसके,…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    सांची के बेसहारों को मिला सहारा, ‘अपना घर आश्रम’ ने बढ़ाया मानवीय सहयोग का हाथ

    सांची के बेसहारों को मिला सहारा, ‘अपना घर आश्रम’ ने बढ़ाया मानवीय सहयोग का हाथ

    पांव से मोहताज, फिर भी योग के प्रति उत्साह कम नहीं — पूर्व पार्षद ने घर पर किया योगाभ्यास।घुटनों की बीमारी के बावजूद अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर दिया स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश

    पांव से मोहताज, फिर भी योग के प्रति उत्साह कम नहीं — पूर्व पार्षद ने घर पर किया योगाभ्यास।घुटनों की बीमारी के बावजूद अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर दिया स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश

    री-नीट परीक्षा से वंचित रहीं छात्राएं, केंद्र पर हुआ हंगामा

    • By admin
    • June 22, 2026
    • 3 views
    री-नीट परीक्षा से वंचित रहीं छात्राएं, केंद्र पर हुआ हंगामा

    अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर स्तूप परिसर में उमड़ा जनसमूह, स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने की शिरकत

    अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर स्तूप परिसर में उमड़ा जनसमूह, स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने की शिरकत

    साँची विश्वविद्यालय में योगाभ्यास एवं योगिक क्रियाओं का प्रदर्शन, 60 पौधों का रोपणकिया।अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर योग, पंचकर्म, नेचुरोपैथी और स्वस्थ जीवनशैली का दिया संदेश

    साँची विश्वविद्यालय में योगाभ्यास एवं योगिक क्रियाओं का प्रदर्शन, 60 पौधों का रोपणकिया।अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर योग, पंचकर्म, नेचुरोपैथी और स्वस्थ जीवनशैली का दिया संदेश

    कमाल की तैयारी 2026″ अभियान: अभिभावक बन रहे बच्चों के लर्निंग पार्टनरस्कूल में प्रवेश से पहले बच्चों की समग्र तैयारी के लिए गतिविधि आधारित सीख और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी पर जोर।

    कमाल की तैयारी 2026″ अभियान: अभिभावक बन रहे बच्चों के लर्निंग पार्टनरस्कूल में प्रवेश से पहले बच्चों की समग्र तैयारी के लिए गतिविधि आधारित सीख और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी पर जोर।