जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़
दिलेशर चौहान ,,,संवाददाता छग
रायपुर राजधानी गाडा चौहान समाज
एवं क्रांति सेना तथा आदिवासी समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों के द्वारा भव्य समारोह हुआ,
बूढ़ा तालाब में स्थापित बूढ़ादेव के प्रतिमा को 10 टन कांस से प्रतिमा बनाई जाएगी ।
जो छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से पुराना कांस घरों घर से मांग कर समाज के द्वारा एकत्रित किए । इस भव्य कार्यक्रम में पूरे छत्तीसगढ़ के गाड़ा चौहान समाज का योगदान सराहनीय माना जा रहा है। क्योंकि उसके हित और समाज को इतिहास से जोड़ने का एक अच्छा कोशिश है ।
साथ ही साथ अपने पूर्वज के इष्ट देव को जानने एवं उसकी स्थापना करने से समाज में और आने वाले समय में,
इतिहास में कायम रहे।
इस कार्यक्रम में वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि समाज 1950 से पहले आदिवासी में था। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद इस संबंध में प्रथम मुख्यमंत्री को गाडा समाज को आदिवासी में करने की पहल की गई थी। आदिवासी होने की झलक फूफू के रिश्ते ,कन्यादान, तथा इष्ट देवता बुढ़ा देव की समाज के द्वारा पूजा अर्चना की जाती है। जिससे आदिवासी होने का आदिवासी देवताओं को पूजने का एवं रहन सहन आदिवासी रीत रिवाज मिलान होता है ।

एवं सिद्ध होता है कि हमारे पूर्वज आदिवासी थे, जिसे तूटी की मात्रा एवं सूची में छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद अनुसूचित जाति शेड्यूल ट्राइब रखा गया।
इस कार्यक्रम में कांसा दान देने वाले समाज के लोग कोने-कोने से पहुंचे थे।
उन्हें खुशी थी की कांस का छोटा सा टुकड़ा इष्ट देव बूढ़ादेव के अंग पर कहीं न कहीं अंश लगा होगा ।खुशी जाहिर कर रहे थे ।

उनका भी योगदान देव के भव्य मूर्ति पर लगी होगी।
इस बूढ़ा तालाब के चारों तरफ खचाखच भरे भीड़ में आदिवासी समाज का झलक नजर आ रहा था। जो देखते ही बन रहा था। इस कार्यक्रम में क्रांति सेना के लोगों ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया जो सराहनीय था। गाड़ा समाज छत्तीसगढ़ में 30 लाख जनसंख्या में रहते हैं 2011 की जनसंख्या के आधार पर देखा जाए दो आज इसकी संख्या ₹5000000 से अधिक आंकी गई है।जो राजनीतिक, सामाजिक दृष्टिकोण से काफी अहम माना जा रहा है।
जिसे उनकी मांगों,
आदिवासी करण, को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।








