नसीम खान संपादक
लंबे समय से सुर्खियां बटोर रही यूनिवर्सिटी
सांची,,, वैसे तो सांची बौद्ध ज्ञान अध्ययन विश्व विद्यालय देश की एक मात्र बुद्ध परंपरा के शोध अध्ययन वाला एक मात्र विश्वविद्यालय है इस विश्व विद्यालय में भर्ती एवं अन्य घोटाले की लंबें समय से मीडिया की सुर्खियां बटोर रही थी परन्तु इस मामले में सरकार चुप्पी साधे रही । यहां पदस्थ कुलपति लंबे समय से जमी हुई थी आखिर कार मीडिया का लगातार बढ़ते दबाव के चलते कुलपति ने अपना इस्तीफा महामहिम राज्यपाल को भेज दिया ।
जानकारी के अनुसार भारतीय बौद्ध ज्ञान अध्ययन यूनिवर्सिटी जबसे बारला में स्थित थी तबसे ही चर्चित हो रही थी यह देश की पहली बौद्ध परंपरा शोध अध्ययन वाली पहली यूनिवर्सिटी होने के साथ ही लंबे समय से लंबें घोटाले की फेहरिस्त समेटे हुए मीडिया की सुर्खियां बटोर रही थी इस मामले में मीडिया को जारी पत्र में डा शैलेन्द्र सिंह ने पूर्व से एवं हाल ही में हुए भर्ती घोटाले में हुई भर्ती क्र 1083,1084,1085 दिनांक 13-4-23 के विज्ञापन में हुई विसंगतियों के चलते जो हाल में भर्ती की गई है उन्हें तत्काल रद्द करने का हवाला दिया गया है इस में बताया गया है कि एक तरफ मुख्यमंत्री की लाडली बहना योजना को हितग्राही के रूप में देखा जा रहा है तो दूसरी ओर इस यूनिवर्सिटी में महिला आरक्षण का भी क्रम तहस नहस कर दिया गया है उक्त विज्ञापन में क्रमश प्रोफेसर एसोसिएट प्रोफेसर एवं असिस्टेंट प्रोफेसर के85 पदों पर विभिन्न विषयों एवं विभाग में भर्ती के लिए जारी किया गया था जो खटाई में पड़ कर रह गया। इस पत्र में कहा गया है कि सांची यूनिवर्सिटी एक्ट 2012 शिक्षक भर्ती नियम 2014 में भी शासन के आदेश के साथ ही आरक्षण के नियम की खुली अवहेलना की गई है हालांकि इस मामले को संज्ञान में आते ही अनुसूचित जाति जनजाति आयोग द्वारा भर्ती को लेकर कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इतना ही नहीं इस घोटाले को लेकर मीडिया तथा अनेक शिकायती ज्ञापन से भर्ती घोटाले की कल ई सांसद पर्यटन व संस्कृति मंत्रालय सहित महामहिम राज्यपाल तक पहुंच गई बताया जाता है इस मामले में शासन द्वारा संज्ञान लेने पर संस्कृति मंत्रालय व सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा समिति का गठन भी किया गया है इसकी जांच सचिव स्तर के अधिकारियों को सौपी गई है। बताया गया है कि इस मामले में उच्च न्यायालय द्वारा भी संज्ञान लिया जाकर यूनिवर्सिटी को नोटिस भी जारी किए गए हैं इस भर्ती कांड की चर्चा हर तरफ जोर शोर से चल रही है इस भर्ती घोटाले में कुलपति एवं कुलसचिव के नाम की जोरों से चर्चा चल रही है सूत्र बताते हैं इस घोटाले के उजागर करने पूर्व में किसी मीडिया द्वारा उठाए जाने पर यूनिवर्सिटी के जिम्मेदारों ने मीडिया के खिलाफ पुलिस में आवेदन भी दिया था जिसमें यूनिवर्सिटी की छवि बिगाड़ने पर मीडिया के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए कहा गया था इसके बाद से ही इस घोटाले को मीडिया ने जमकर उछाल दिया । जबकि वर्ष 2014 में पहली कार्यपरिषद की बैठक में पारित किया गया था कि शिक्षकों की भर्ती यूजीसी की गाइड लाइन अनुसार होगी । परन्तु शासन के सभी नियमों को ताक पर रख कर तथा आरक्षण को धता बता कर 13-4-23 निकाली गई भर्ती में भी योग्यता को दरकिनार किया जाकर एवं आरक्षित पदों पर भर्ती से खिलवाड़ किया जाकर खाना पूर्ति की गई इस पत्र में कहा गया है कि यूनिवर्सिटी एक्ट 2012 का भी उल्लंघन किया गया है बताया गया है कि आरक्षण रोस्टर के साथ भी छेड़छाड़ की गई है इस प्रकार बौद्ध यूनिवर्सिटी में भर्ती में बड़ा गड़बड़झाला किया गया है इस भर्ती कांड में बड़ी विसंगति भी दिखाई दे रही है। इस यूनिवर्सिटी की प्रारंभ से अब तक की उच्च स्तरीय जांच की जाये तो बड़े गड़बड़ झाला उजागर होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। अब जब मामला तूल पकड़ गया तब कुलपति डॉ नीरजा गुप्ता ने अपना त्यागपत्र महामहिम राज्यपाल को भेज दिया । हालांकि बताया जाता है कि डॉ गुप्ता का चयन गुजरात यूनिवर्सिटी में हो गया है हाल ही में क्षेत्रीय सांसद रमाकांत भार्गव ने भी आश्वस्त किया कि सांची यूनिवर्सिटी भर्ती मामले की जांच करवाई जाएगी । हालांकि डॉ गुप्ता वर्ष 2012 से सांची बौद्ध यूनिवर्सिटी के कुलपति पद पर आसीन थीं। हालांकि इस त्यागपत्र को भर्ती मामले से भी जोड़कर देखा जा रहा है।






