नसीम खान संपादक
सांची,,, वैसे तो इन दिनों अनगिनत मोबाइल कंपनी चल रही है तथा उपभोक्ताओं को मीठे मीठे लुभाने वायदे कर देती है तथा चार्ज के नाम पर लाखों करोड़ों कमा लेते हैं बावजूद इसके सुविधाओं के नाम पर उपभोक्ताओं को ठगने के खेल चलता रहता है जिससे सरकार की डिजिटल व्यवस्था भी पूरी तरह थम कर रह जाती है ।
जानकारी के अनुसार भारत सरकार ने डिजिटल व्यवस्था तो शुरू कर दी है तथा लोगों को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने प्रयास किए परन्तु यह प्रयास तब खटाई में पडते दिखाई देते हैं जब मोबाइल कंपनियां डाटा देने के नाम पर तथा अपनी अपनी कंपनी से जुड़ने लुभावने वायदे तो कर देती है जिससे उपभोक्ता इन कंपनियों के लुभावने वायदे की जद में आ जाते हैं तथा इन उपभोक्ताओं से नेटवर्क डाटा के नाम पर मनमानी राशि वसूली करने में पीछे नहीं रहतीं तथा इन कंपनियों की अपनी कोई व्यवस्था नहीं रहती इनका अधिकांश दारोमदार बिजली पर ही निर्भर रहता है जैसे ही बिजली गुल होती है वैसे ही मोबाइल कंपनियों के नेटवर्क व्यवस्था थम जाती है जबकि बिजली वैसे ही अपने उपभोक्ताओं को राहत देने में सक्षम नहीं दिखाई देती इस बिजली व्यवस्था पर ही मोबाइल कंपनियों का दारोमदार टिका रहता है जबकि मोबाइल कंपनियों को अपनी स्वयं की व्यवस्था की जानी होती है तथा अपने कर्मचारियों से व्यवस्था सुचारू बनाए रखने चाहिए थे परन्तु इन बडी बडी कंपनी के कर्मचारी कंपनी से बड़े होकर व्यवस्था सुचारू बनाए रखने में सफल नहीं हो पाते जबकि इन कंपनियों ने टावरों पर अपने स्वयं के जरनेटर तो लगा रखे हैं जिससे जब बिजली व्यवस्था गड़बड़ाने लगे तब इन्हें शुरू किया जाकर उपभोक्ताओं को सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। बावजूद इसके यह व्यवस्था उपभोक्ताओं से नेटवर्क चार्जिंग के नाम पर कंपनियों ने खुलेआम लूट का खेल चला रखा है । इससे न केवल मोबाइल कंपनियों द्वारा दी गई सुविधा चौपट हो जाती है बल्कि सरकारी कामकाज भी ठप्प पड़ कर रह जाते हैं ।इन कंपनियों पर न तो किसी कानून का ही डर रहा है न ही शासन प्रशासन का ही खौफ रहा है सरकारें इन मोबाइल कंपनियों पर लगाम लगाने की भी व्यवस्था जुटाने आगे बढ़ कर उपभोक्ताओं को राहत देने आगे आए।






