ग्वालियर। सिंधिया राज परिवार बीती रात रामलीला देखने पहुंचा उन्होंने लीला में राम , लक्षमण और सीता की आरती उतारकर और पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत और अभिनंदन किया । ग्वालियर में सिंधिया राज परिवार द्वारा लगभग सौ वर्ष पहले इस रामलीला की शुरुआत करवाई गई थी तब से कोरोनाकाल को छोड़कर निरंतर इसका आयोजन हो रहा है और कम से कम एक बार सिंधिया परिवार आरती कर इसे देखने अवश्य पहुंचता है।
सिंधिया राजवंश द्वारा शुरू करवाई गई ग्वालियर की ऐतिहासिक रामलीला का मंचन देखने देर रात केंद्रीय मंत्री और सिंधिया राज परिवार के मुखिया ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने पूरे परिवार सहित पहुंचे । यानी उनकी पत्नी प्रियदर्शनी राजे और बेटे महान आर्यमन भी उनके साथ थे। सिंधिया ने यहां रामलीला में राम, सीता, लक्ष्मण की भूमिका निभा रहे कलाकारों की आरती उतारी और फिर दर्शक दीर्घा में बैठकर रामलीला का मंचन भी देखा।
पहले छत्री मंडी में होती थी यह रामलीला
इस रामलीला की शुरुवात जीवाजी राव महाराज प्रथम द्वारा करवाई गई थी । तब महाराज और महारानी अनेक बार आरती उतारने जाते थे और इसका आयोजन तब के गोरखी महल के नजदीक स्थित शाही छतरियों के सामने होता था। वहां बाद में सब्जी और फ्रूट की दुकानें लगने लगी इसलिए उसे छत्री मंडी कहा जाने लगा । लगभग सौ वर्ष तक यहीं पर रामलीला का मंचन होता रहा और यही रावण दहन होता था लेकिन अब इस मैदान में हॉकी स्टेडियम का निर्माण हो गया इसलिए कुछ वर्षों से यह आयोजन फूलबाग मैदान में होने लगा है।
सिंधिया बोले सिंधिया परिवार हिन्दू संस्कृति की रक्षा में अग्रणी रहा
सिंधिया ने कहा कि मराठा राज परिवार का हिंदू संस्कृति से सदैव जुड़ाव रहा है । शिवाजी महाराज से लेकर माधव महाराज तक हिंदू संस्कृति की रक्षा के लिए हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई है । चाहे काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र को विकसित करने का काम हो जिसका जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भी सिंधिया स्कूल पर दिए अपने उदबोधन में किया या फिर उज्जैन में महाकाल मंदिर को संरक्षित करने का काम सिंधिया राज परिवार ने करवाया। हमारा परिवार हमेशा हिंदू संस्कृति के लिए आगे रहा है और आगे भी रहेगा। रामलीला समारोह समिति द्वारा यहां सिंधिया परिवार का जोरदार स्वागत भी किया गया।






