रोम रोम में राम सुना था और आज देखा भी रामनवमीयों ने अपना परंपरागत मुकुट बनाकर मुख्यमंत्री विष्णु देव सायं को स्वागत किया

जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़
संवाददाता दिलेसर चौहान

छत्तीसगढ़ के महानदी किनारे जेजेपुर ,रायपुर ,कुरूद में बड़े भजन मेला सबसे हटकर होता है। जिसे शायद आप नहीं जानते ना आपने कभी देखा होगा ।आपको यह बता दें कोई भी जाति, धर्म, का व्यक्ति जिसका खान-पान और मन शुद्ध हो वह बन सकता है रामनामी
प्रत्येक वर्ष महानदी के दोनों पार बारी-बारी से आयोजित होने वाले रामनामी मेले में दूर-दूर के गांव से आकर आमजन रामनामीयों के साथ पूरी रात रहते हैं, और शांतिपूर्वक रामनवमी मेले में शामिल होते हैं ।
रामनामी की कलश यात्रा निकाली गई ,22 तारीख को इस बड़े भजन मेला में क्षेत्र के कुंवारी लड़कियों सहित इच्छुक युवाओं की शादी की जाती है।


वास्तव में राम भक्तों का एक अनोखा मिला है
जिसमें पौस शुक्ल एकादशी से त्रयोदशी ,तक तीन दिवस इस मेले में रामनामी राम भक्त, राम राम जपते जैतखाम चबूतरे में पूरे दिन और रात रहते हैं।
और राम भजन करते हैं जो किसी तप से कम नहीं ।
वर्तमान कलयूग के समय में भी इस तरह से रामनामी होना पूरे सद्विचार ,शाकाहार, के साथ बिना किसी बुराई के इस तरह का श्रद्धा पूर्ण मेला आयोजित होना वास्तव में आज के परिवेश में अनुकरणीय है
वास्तव में या रामनामी प्रभु श्री राम के सच्चे भक्त हैं
रामनामी मेले में आए
तिहारू राम रामनामी ने बताया राम के नाम से ही मानव जीवन के साथ है,
व्यक्तियों के पूरे शरीर में गोधना, टैटू ,से राम राम लिखा होता है। पूरे चेहरे में पलकों होठों पर पूरे अंग में आसहनी दर्द को सहकर राम नाम लिख कर राम भक्त रामनामी कहलाते हैं । यह 300 सालों से भी अधिक से परंपरा नियम चला आ रहा है


उनके शरीर को देखने से पता चलता है कि उनकी दृढ़ शक्ति, भगवान राम के ऊपर आस्था कितनी है।
वास्तव में राम भक्तों का एक अनोखा मेला है, राम नाम को अपने अंग अंग में, हृदय में, तथा चेतना ,में बसाने वाले रामनवमी समुदाय के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव सायं को अपना परंपरागत मुकुट बनाकर अभिनंदन किया। उनके मोर मुकुट में राम नाम लिखा होता है ।अंतिम दिन पंडाल के नीचे जमीन पर पूरे मेले में आए श्रद्धालुओं के लिए दाल भात सब्जी, बनकर जमीन पर प्लास्टिक बबिछाकर डाल दिया जाता है और श्रद्धालु उस पर मनचाहा मुर्रा स,जलेबी ,कई तरह की मिठाइयां उसमे पर फेंक देते हैं। जिसकी कई ट्रैक्टर खाना प्रसादी के रूप में सभी श्रद्धालु मेले में जुटे व्यक्ति निकालकर प्रसादी के रूप में ग्रहण करते हैं।मुख्यमंत्री के साथ ही उन्होंने श्री ओम माथुर ,को भी मुकुट पहनकर अभिनंदन किया।

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