जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़
संवाददाता,, दिलेसर चौहान
यहां के मूल निवासी अधिकांश आदिवासी जंगलों में निवास करते हैं ।
वैसे तो बनवासी लोग जंगलों से लकड़ी चुन छोटे-छोटे घर बनाकर खेती ,किसानी, कर जीव पार्जन करते हैं।
और वन्य प्राणियों गाय बकरी भेड़ को पालकर अपना जीवका पार्जन करते हैं ।
वह मेहनतकश और भोले भाले ईमानदार लोग होते हैं।
जिसे धन संग्रहित करना नहीं आता ।
वह पेट भर खाना और जीवन जीने के लिए मूलभूत सुविधा मिल जाए यह काफी है।
मगर उनके जीवन पर प्रश्न चिन्ह लग गया है ।
आदिवासी वनांचल में रहने वाले बैगा आदिवासियों लुप्त के कगार पर है ।
बैगा जाति के लोग सुरक्षित नहीं है, आए दिन आदिवासियों के संबंध हृदय विदारक सूचना मिलती है।
आए दिन कुछ न कुछ घटनाएं इन लोग के साथ होना लाजमी है पिछले समय कवर्धा के पंडरिया नांगा डबरा में बैगा आदिवासी परिवार को जलाकर निर्मम हत्या कर दी गई ।
छत्तीसगढ़ प्रदेश में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र माने जाने वाले आदिवासियों की हत्या हो रही है और दूसरी तरफ भाजपा सरकार ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर चुप है। माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव सहाय आदिवासी हैं ।
और पहली बार आदिवासियों को लग रहा है कि उनकी सरकार है उनके आदिवासी समाज की सरकार है।
वह ज्यादा आशाएं रखते हैं।






