नसीमखान
रायसेन,
अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस 10 दिसम्बर के अवसर पर प्रधान जिला न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष श्री अनिल कुमार सोहाने के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायसेन द्वारा जिला जेल में विधिक साक्षरता शिविर सह जेल निरीक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
शिविर में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री राजीव राव गौतम ने अपने उद्बोधन में कहा कि विश्व मानवाधिकार दिवस प्रतिवर्ष 10 दिसम्बर को मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार वह अधिकार है जो प्रत्येक मानव को उसके जन्म से प्राप्त होते है। इन्हें प्राकृतिक अधिकार भी कहा जाता है जो कि प्रत्येक मानव के शारीरिक, मानसिक व सामाजिक विकास के लिए परम आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत में मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 अधिनियमित किया गया है जिसमें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग एवं जिला स्तर पर मानवाधिकार न्यायालय की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि चाहे वह जेल में निरूद्ध बंदियों की प्रताड़ना के विषय में हो, अस्पतालों में मरीजो के उचित उपचार के संबंध में हो, मानव र्दुव्यापार के विषय में हो, खाद्य सामग्री के मिलावटों के संबंध में हो, पेंषन भुगतान के संबंध में या मजदूरों को मजदूरी भुगतान के संबंध में हो मानवाधिकार आयोग इन संबंधों में संज्ञान लेकर कार्यवाही कर मानवाधिकार की रक्षा करता है।
कार्यक्रम में उपस्थित श्री राजेन्द्र सिंह शाक्या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रायसेन द्वारा अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा गया कि ऐसा कोई भी अवैधानिक कृत्य जो जीवन को खतरे में डालता हो, आजादी को छीनता हो, भेदभाव मूलक हो और मानव गरिमा को नुकसान पहॅुचाता हो ऐसे कृत्य मानव अधिकार के उल्लंघन की श्रेणी में आते है। शिविर में जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री अनीस उद्दीन अब्बासी, जेल अधीक्षक श्री रामकृष्ण चोरे, असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस कांउसिल्स श्री शुभम मालवीय समेत जेल कर्मी उपस्थित रहे।






