गांव-गांव में परोसी जा रही अवैध शराब, सांची समेत कई क्षेत्रों में माफिया का बोलबाला।

नसीमखान
सांची,, स्थानीय प्रशासन और आबकारी विभाग की चुप्पी से महिलाओं में गहरा आक्रोश बढने लगा है नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों तक शराब माफिया ने अपने पांव पसार लिये हैं शराब माफिया पूरी तरह बेलगाम हो चुका है जिसका खामियाजा गरीब वर्ग भुगतने पर मजबूर है।
जानकारी के अनुसार इन दिनों शराब माफिया ने नगर को तो अपनी चपेट में ले ही लिया है तथा इस पवित्र बौद्ध ऐतिहासिक पर्यटक स्थल की छवि बिगाडने का मन बना लिया है । इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों तक घर घर शराब परोसने का कारोबार तेजी से बढ गया है एवं सांची और इसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों—गुलगांव, उचेर, ऐरन, चिरोली, आमखेड़ा, ढकना, चपना सहित दर्जनों गांव—इन दिनों अवैध शराब कारोबार के शिकंजे में फंसे हुए हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि शराब माफिया अब गांव-गांव अपने वाहनों से घर-घर शराब की आपूर्ति कर रहे हैं। इस अवैध धंधे से सबसे अधिक परेशानी घरेलू महिलाओं को हो रही है, जिनके घर उजड़ने की नौबत आ चुकी है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शराब माफिया के आगे पुलिस और आबकारी विभाग दोनों ही नतमस्तक हो चुके हैं। माफियाओं को खुली छूट मिलने के चलते क्षेत्र में कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
शराब दुकान पर मनमानी कीमतें, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की उड़ रही धज्जियां।
सांची नगर में एक ही दुकान के नाम पर दो शराब दुकानें संचालित की जा रही हैं, जहां रेट सूची न दर्शाकर मनमानी कीमतों पर शराब बेची जा रही है। शराब शौकीन लूटे जाने को मजबूर हैं और इसके पीछे एक मजबूत संगठित नेटवर्क बताया जा रहा है, जो सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की भी खुलेआम धज्जियां उड़ा रहा है।
महिलाएं कर चुकी हैं कई बार विरोध, सरकार और प्रशासन बने हैं मूकदर्शक
ग्रामीण महिलाओं ने कई बार सड़कों पर उतर कर शराब माफियाओं के खिलाफ आवाज उठाई, लेकिन न तो सरकार ने संज्ञान लिया और न ही स्थानीय प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई की। इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थल पर खुलेआम शराब का खेल जारी है, जो न केवल सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे भी सक्रिय माफिया, गरीब वर्ग हो रहा सबसे अधिक प्रभावित
राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे क्षेत्रों में भी शराब माफिया सक्रिय हैं, जहां गरीब और दैनिक मजदूरी करने वाला वर्ग अपनी मेहनत की कमाई शराब में गंवा रहा है। नशे की गिरफ्त में फंसते जा रहे इन लोगों के कारण उनके परिवारों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इतना ही नहीं एक ओर सरकार ने शराब दुकानों के आसपास अहाते बंद करने के निर्देश जारी किए थे परन्तु स्थिति जस की तस बनी हुई है इसके साथ ही शाम होते ही शराब दुकानों पर नशैडियो का मेला लगने लगता है जिससे शराब के शौकीन अपने वाहनों को राष्ट्रीय राजमार्ग पर ही खडे कर अपने शौक पूरे करने लगते है जिससे वाहन चालकों को भी खासी परेशानी उठानी पड़ती है तथा वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो ती है इसके साथ ही अनेक बार लोग दुर्घटना का शिकार भी बन चुके है इस ओर से पुलिस भी पूरी तरह बेखबर बनी हुई है । कहीं न कहीं शराब माफिया एवं पुलिस की मिलीभगत पर भी सवाल खड़े हो रहे है । जब जब शराब के शौकीन लोगो से शराब माफिया से बहस होती है तब शराब माफिया के पालतू गुर्गे भी हाथापाई करने सामने आ जाते है ।
समाप्ति पर एक सवाल: आखिर कब जागेगा प्रशासन?
अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन और सरकार इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाएंगे, या फिर यह अवैध कारोबार यूं ही गांवों की जड़ें खोखली करता रहेगा?

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