नसीमखान
सांची – इन दिनों आसमान छूती मंहगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ कर रख दी है। खासतौर पर मध्यम वर्गीय परिवार इस बेलगाम मंहगाई के बोझ तले बुरी तरह दबे हुए हैं। न तो सरकार की नजर इस ओर जाती नजर आ रही है और न ही प्रशासन को कोई फुर्सत है कि वह इस दिशा में कोई ठोस कदम उठा सके।
सरकार जहां गरीब तबके के लिए सैकड़ों जनकल्याणकारी योजनाएं चला रही है, वहीं अमीर वर्ग पर मंहगाई का कोई असर नहीं दिखता। मगर इसके बीच पिस रहा है देश का मध्यम वर्ग, जो न तो सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकता है और न ही महंगी चीजें आसानी से खरीद सकता है।
नमक से लेकर सब्जी तक सब महंगा ।
नमक, मिर्ची, तेल, आटा, दाल, मसाले और सब्जियों के बढ़ते दामों ने रसोई का बजट बिगाड़ कर रख दिया है। हर दिन कीमतों में इजाफा मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। एक ओर आय सीमित है, दूसरी ओर खर्चों में बेतहाशा बढ़ोतरी हो रही है।
दवाओं ने बढ़ाया दर्द ।
स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत और महंगी दवाइयों ने मध्यम वर्ग के सामने एक और नई चुनौती खड़ी कर दी है। बीमार पड़ना अब इन परिवारों के लिए दोहरी मार जैसा हो गया है — एक तो शारीरिक कष्ट और ऊपर से आर्थिक बोझ। यही कारण रहता है जब मध्यम वर्गीय परिवार अपने एवं अपने परिवार के जीवन के लिए जद्दोजहद करते दिखाई दे जाते है ।
कब मिलेगी राहत?
अब सवाल यह है कि क्या सरकार कभी मध्यम वर्ग की सुध लेगी? क्या मंहगाई पर लगाम लगाने के लिए कोई ठोस नीति बनेगी? फिलहाल तो ऐसा कोई संकेत नजर नहीं आता, और मध्यम वर्गीय परिवारों की तकलीफें दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं।
न ही सरकारों न ही प्रशासन को सुध लेने की फुरसत मिल पा रही है।जिससे मध्यम वर्गीय परिवार को भी समाज में जीने का हक मिल सके तथा इस बढती मंहगाई से निजात पा सके ।






