नसीमखान
नगरवासियों को शुद्ध हवा और ऑक्सीजन के लिए तरसना पड़ रहा।
सांची,, एक समय हरियाली के लिए पहचाने जाने वाले ऐतिहासिक नगर सांची में आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। गर्मी ने इस बार अपना रोद्र रूप धारण कर लिया है, और नगरवासी झुलसती धूप तथा उमस भरी गर्म हवाओं से बेहाल हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह नगर की तेजी से खत्म होती हरियाली मानी जा रही है।
जानकारी के अनुसार यह नगर हराभरा हुआ करता था तथा नगर की हरियाली भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करने में पीछे नहीं रहती थी परन्तु इस नगर को विकास का जामा पहनाने की कवायद के तहत नगर की हरियाली तहसनहस हो गई तब इस नगर में सड़क और भवन निर्माण की होड़ में नगर के सैकड़ों पेड़ काट दिए गए, जिससे नगर की हरित आच्छादित छवि अब बीते दिनों की बात बन चुकी है। कुछ वर्ष पूर्व जब राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के तहत पेड़ काटे गए थे, तब जनता और पर्यावरण प्रेमियों द्वारा विरोध प्रदर्शन हुआ था। तब राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग ने पेड़ लगाने का आश्वासन दिया था, लेकिन समय के साथ वह आश्वासन भी हवा हो गया।
हरियाली के अभाव ने न केवल नगर की सुंदरता छीनी है, बल्कि इससे लोगों को मिलने वाली शुद्ध वायु और ऑक्सीजन की भी भारी कमी हो गई है। गर्मी के बढ़ते प्रभाव से लोग न केवल बीमार पड़ रहे हैं, बल्कि सामान्य जीवन भी अस्त-व्यस्त हो चला है। बुजुर्गों, बच्चों और अस्थमा मरीजों के लिए यह स्थिति और भी चिंताजनक है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द ही हरियाली को बहाल करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सांची की फिजा में सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा। अब ज़रूरत है कि प्रशासन और आमजन मिलकर पेड़ लगाने की दिशा में गंभीर प्रयास करें और नगर को फिर से हरा-भरा बनाये। हालांकि इस नगर में समय समय पर लाखों रुपए खर्च कर पौधे रोपे गए परन्तु यह मात्र दिखावा साबित हो कर रह गया तथा सरकार की राशि की भेंट चढती रही नतीजा कुछ नहीं निकला ।नगर को हराभरा मात्र अखबारों तक ही सिमट कर रह गया ।






