भोपाल मास्टर प्लान विवाद: सीलिंग के विरोध में कोलार में 20 साल का सबसे बड़ा लॉकडाउन; 3 हजार दुकानों के लटके ताले

रिपोर्ट : अजय अहिरवार|भोपाल

भोपाल: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के आवासीय इलाकों (Residential Zones) में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की सख्त सीलिंग कार्रवाई ने शहर के व्यापार जगत में बड़ा आक्रोश पैदा कर दिया है। इस कार्रवाई के विरोध में कोलार रोड क्षेत्र में बीते दो दशकों का सबसे बड़ा व्यापारिक बंद देखा गया, जहाँ करीब 3,000 छोटी-बड़ी दुकानों के शटर पूरे दिन बंद रहे।

शहर के मुख्य व्यापारिक गलियारों—कोलार, नर्मदापुरम रोड, शाहपुरा, बावड़ियाकलां और अरेरा कॉलोनी जैसे इलाकों में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। एक ओर जहाँ रहवासी संघ आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों का विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हजारों व्यापारी अपने रोज़गार को बचाने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं।

अभूतपूर्व बंद और व्यापारियों का अनोखा विरोध

नगर निगम द्वारा आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील करने और तोड़फोड़ की कार्रवाई के विरोध में कोलार व्यापारी संघ ने स्वतः स्फूर्त बंद का आह्वान किया।

  • 3,000 दुकानें बंद: सुबह से ही कोलार रोड, गेहूंखेड़ा, ललिता नगर और बीमा कुंज सहित आसपास के बाजारों में व्यापार ठप रहा।
  • ‘व्यापार की अर्थी’ निकाली: आक्रोशित व्यापारियों ने सांकेतिक रूप से “व्यापार की अर्थी” निकालकर विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी की।
  • निगम टीम को लौटना पड़ा: कई स्थानों पर जब नगर निगम का दस्ता सीलिंग के लिए पहुँचा, तो व्यापारियों की भारी भीड़ और विरोध के चलते उन्हें बिना कार्रवाई किए वापस लौटना पड़ा।

विवाद का मूल कारण: क्यों ‘अवैध’ हुईं 20 साल पुरानी दुकानें?

भोपाल का शहरी विस्तार पिछले दो दशकों में तेजी से हुआ है। 1995 और 2005 के मास्टर प्लान के बाद से नया मास्टर प्लान अधिसूचित नहीं हो सका है।

  1. बढ़ती आबादी और स्वाभाविक बाज़ार: जैसे-जैसे शहर की आबादी बढ़ी, मुख्य सड़कों (40 से 60 फीट चौड़ी सड़कें) पर जरूरतों के हिसाब से दुकानें, बैंक, पैथोलॉजी लैब, और रिटेल आउटलेट्स खुलते चले गए।
  2. प्रशासनिक सुस्ती: 2005 के बाद से शहर के लिए नया मास्टर प्लान लागू नहीं किया गया। इसके कारण कागजों में ये चौड़ी सड़कें और बाजार ‘आवासीय zone’ ही दर्ज रहे, जबकि ज़मीन पर ये प्रमुख व्यावसायिक गलियारे बन चुके हैं।

‘मिक्स्ड लैंड यूज’ (Mixed Land Use) का फॉर्मूला: क्या है समाधान?

देश के अन्य प्रमुख महानगरों ने आवासीय क्षेत्रों में बन चुके बाजारों को नियमित करने के लिए ‘मिक्स्ड लैंड यूज Policy’ लागू की है।

अन्य शहरों का मॉडल:

  • दिल्ली, जयपुर, रायपुर, चेन्नई: इन शहरों में यदि कोई सड़क 10 मीटर (लगभग 33 फीट) या उससे अधिक चौड़ी है, तो उसके ग्राउंड फ्लोर पर रीटेल दुकानों, क्लीनिकों और ऑफिस गतिविधियों को कानूनी मान्यता दी गई है।

भोपाल मास्टर प्लान ड्राफ्ट में क्या प्रावधान था?

  • 2019 का ड्राफ्ट: 2019 में तैयार भोपाल मास्टर प्लान-2031 के प्रारूप में मिक्स्ड लैंड यूज का स्पष्ट प्रावधान रखा गया था। तत्कालीन टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) के अधिकारियों ने माना था कि बढ़ती आबादी और चौड़ी सड़कों पर व्यापार को नियमित करना शहर की जरूरत है।
  • 7 साल से अटका निर्णय: 2019 के बाद से राजनीतिक खिंचातान, जनप्रतिनिधियों की आपत्तियों और प्रशासनिक देरी के कारण यह ड्राफ्ट लागू नहीं हो सका और फरवरी 2024 में रद्द भी कर दिया गया।

सरकार की पहल और वर्तमान स्थिति

व्यापारियों के भारी विरोध और जन-प्रतिनिधियों के दबाव के बाद राज्य सरकार ने मामले में हस्तक्षेप किया है:

  • उच्चस्तरीय समिति का गठन: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अफसरों की एक समिति गठित की गई है जो पूरे मामले की समीक्षा कर रही है।
  • जनप्रतिनिधियों से सुझाव: नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को जारी करने से पहले भोपाल के सभी सांसदों, विधायकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से राय ली जा रही है ताकि भविष्य में कोई टकराव न हो।
  • व्यापारियों का अल्टीमेटम: व्यापारी संगठनों का कहना है कि यदि सरकार ने तत्काल प्रभाव से मिक्स्ड लैंड यूज का अध्यादेश जारी नहीं किया या मास्टर प्लान लागू नहीं किया, तो यह आंदोलन केवल कोलार तक सीमित न रहकर पूरे भोपाल बंद में बदल जाएगा।

निष्कर्ष

भोपाल में जारी सीलिंग विवाद इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण है कि जब शहरी नियोजन (Urban Planning) समय के साथ अद्यतन (Update) नहीं होता, तो उसका खामियाज़ा आम नागरिकों और व्यापारियों को भुगतना पड़ता है। मिक्स्ड लैंड यूज नीति को पारदर्शी ढंग से लागू करना ही इस संकट का एकमात्र स्थाई समाधान नज़र आता है।

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