नसीमखान सांची, रायसेन
नोटिस प्रक्रिया में त्रुटि के बाद तीन कर्मचारी निलंबित, पुराने-नए अतिक्रमण के भेद और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर बहस तेज
सांची,,,विश्व धरोहर नगरी सांची में अतिक्रमण हटाने का अभियान अब विवादों में घिरता जा रहा है। नोटिस जारी करने की प्रक्रिया में सामने आई त्रुटियों, तीन कर्मचारियों के निलंबन और कार्रवाई की लगातार टलती तारीखों के बीच पूरे अभियान की पारदर्शिता एवं प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व भोपाल में आयोजित समीक्षा बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री एवं क्षेत्रीय सांसद शिवराज सिंह चौहान के समक्ष नगर परिषद अध्यक्ष पप्पू रेवाराम अहिरवार ने सांची में बढ़ते अतिक्रमण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद केंद्रीय मंत्री ने जिला प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। निर्देशों के बाद नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी रामलाल कुशवाहा ने टीम गठित कर अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कराई।
हालांकि, नोटिस जारी होते ही कई लोगों ने नगर परिषद कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। आरोप लगाया गया कि सर्वे और सूची तैयार करने में त्रुटियां हुई हैं तथा कई ऐसे लोगों को भी नोटिस जारी कर दिए गए, जिनके मामलों की स्थिति स्पष्ट नहीं थी। विरोध के बाद नगर परिषद ने कार्रवाई करते हुए सर्वे से जुड़े तीन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया।
इसी बीच पूरे अभियान में पुराने और नए अतिक्रमण का मुद्दा भी चर्चा का विषय बन गया। नगर में यह सवाल उठ रहे हैं कि यदि सरकारी भूमि पर वर्षों से बने निर्माणों से विभिन्न प्रकार के कर और शुल्क वसूले जाते रहे हैं, तो केवल नए निर्माणों को अतिक्रमण मानकर कार्रवाई करना कितनी न्यायसंगत है। बताया जा रहा है कि कुछ मामलों में प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों तक को नोटिस जारी किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
लोगों का यह भी कहना है कि जब अतिक्रमण सूची तैयार की गई और उसके आधार पर नोटिस जारी हुए, तब सूची का परीक्षण और अनुमोदन भी प्रशासनिक स्तर पर किया गया था। ऐसे में केवल अधीनस्थ कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय किए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। निलंबित कर्मचारी भी अपने विरुद्ध की गई कार्रवाई को अनुचित बता रहे हैं।
नगर में चर्चा है कि चुनावी वर्षों में सरकारी भूमि पर हुए अतिक्रमण समय रहते नहीं रोके गए, जिसके कारण अब स्थिति जटिल हो गई है। वर्तमान में कार्रवाई की तिथियां लगातार आगे बढ़ने से अभियान की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। माना जा रहा है कि अब इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।
सपा नेता आर.एस. यादव ने कहा कि सरकारी भूमि पर वर्षों तक अतिक्रमण होना प्रशासनिक लापरवाही अथवा मिलीभगत की ओर संकेत करता है। उनका कहना है कि यदि शुरुआती दौर में ही प्रभावी कार्रवाई की जाती तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने तीन कर्मचारियों के निलंबन को भी एकतरफा बताते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की, ताकि वास्तविक जिम्मेदारों की पहचान हो सके।।।
अतिक्रमण हटाने का उद्देश्य सरकारी भूमि को मुक्त कराना है, लेकिन यदि प्रक्रिया ही विवादों में घिर जाए तो अभियान की निष्पक्षता और विश्वसनीयता दोनों पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। अब सबकी निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई और संभावित जांच पर टिकी हैं।





