राशि भुगतान के लिए परेशान अन्नदाता:,मूंग खरीदी के 39 दिन बाद भी 271 किसानों के 7.12 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं हो सका

वसीम कुरैशी रिपोर्टर

रायसेन।जिले में मूंग की खरीदी को बंद हुए पूरे 39 दिन बीत चुके हैं। इसके बाद भी सभी किसानों का मूंग उपज की राशि का भुगतान नहीं हो पाया है। 1 जुलाई से 3 अगस्त के बीच 23 हजार 106 किसानों से 77 हजार 930 टन मूंग न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी गई थी।इसे लेकर 604 करोड़ रुपए का भुगतान किसानों को खरीदी की तारीख के 7 दिन के अंदर किया जाना था।लेकिन एक महीने से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद 271 किसानों का 7 करोड़ 12 लाख रुपए का भुगतान नहीं किया गया है। जिम्मेदारों के मुताबिक पूरी राशि के ईपीओ जारी कर दिए गए हैं। शासन स्तर से ही भुगतान लंबित है।ऐसी स्थिति में जिले के अन्नदाताओं के सामने समस्या खड़ी हो गई है जिससे किसान बेहद चिंतित हैं।हालांकि वे शीघ्र ही मूंग का शेष भुगतान होने की संभावना जता रहे हैं। बीते 15 दिनों में भी काफी भुगतान हुआ है। सवाल यह उठता है कि एमएसपी की खरीदी को लेकर किसानों को भुगतान करने के लिए 7 दिन की गाइड लाइन है। यानि की समर्थन मूल्य केंद्र पर तुलाई के सात दिन के अंदर संबंधित किसान के बैंक खाते में राशि का भुगतान हो जाना चाहिए पर ताज्जुब की बात तो यह है कि तय अवधि से चार गुना ज्यादा समय लग जाने के बाद भी किसानों को भुगतान नहीं हो सका है।
पोर्टल बंद होने से अगस्त में शुरू हुई थी मूंग की खरीदी…..
इस बार ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीदी पहले से ही काफी विलंब से शुरू हुई है। सामान्य तौर पर जिले में जून के महीने में मूंग की फसल कटाई शुरू हो जाती है। लेकिन मूंग खरीदी के लिए 1 अगस्त का समय तय किया गया। इससे हुआ यह कि जरूरतमंद किसानों ने मजबूरी में 5 से 6 हजार रुपए प्रति क्विंटल के रेट पर जिले की कृषि उपज मंडियों में मूंग की तुलाई करा दी। जबकि मूंग के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य शासन स्तर से 7750 रुपए तय किया गया है। इस तरह से प्रति क्विंटल 1700 से 2000 रुपए तक का नुकसान किसानों को उठाना पड़ा है। मूंग उत्पादक किसानों के मुताबिक यदि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीदी जुलाई से पहले शुरू करवानी चाहिए थी। इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ और भी किसानों को मिल पाता, लेकिन देरी से शुरू हुई खरीदी के कारण कई किसान इसके लाभ से वंचित रहे गए।

बहुत मेहनत की है ग्रीष्म कालीन मूंग की फसल में…..
मूंग उत्पादक किसानों के मुताबिक अप्रैल और मई में तेज गर्मी पड़ती है। तापमान 40 से 44 डिग्री पर चलता है। वहीं बिजली की कम उपलब्धता के बीच मूंग की फसल की सिंचाई करना बहुत ही मुश्किल काम होता है। हर सात दिन में फसल की सिंचाई करना होती है, ऐसा न कर पाने से फसल के सूखने की कगार पर पहुंच जाती है। इस तरह से मूंग की फसल की सिंचाई पूरे 2 महीने तक करना होती है। उस समय जल स्रोतों में पानी की उपलब्धता भी कम हो जाती है। इन सब चुनौतियों के बीच किसान ग्रीष्मकालीन मूंग का उत्पादन बड़े पैमाने पर करते हैं।
न्यूनतम समर्थन पर मूंग की खरीदी कुल पंजीयन- 35221 कुल विक्रेता – 22860 मात्रा- 77930.85 राशि- 60435.33 भुगतान- 59713.63 किसान- 22649 शेष राशि- 712.7 करोड़ किसान- 271

नसीम खान संपादक

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