कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में मप्र प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग की बैठक सम्पन्न

नसीमखान

नागरिकों की सुविधाओं तथा जनअपेक्षाओं को केन्द्र में रखकर बनाए जाए प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन के प्रस्ताव

रायसेन,
मप्र प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग की बैठक आयोग के सदस्य श्री मुकेश शुक्ला तथा सदस्य सचिव श्री अक्षय सिंह की उपस्थिति में आयोजित की गई। बैठक में कलेक्टर श्री अरूण विश्वकर्मा, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती अंजू पवन भदौरिया, अपर कलेक्टर श्रीमती श्वेता पवार सहित डिप्टी कलेक्टर, एसडीएम, जनपद सीईओ तथा तहसीलदार उपस्थित रहे।
बैठक में आयोग के सदस्य श्री मुकेश शुक्ला ने आयोग के गठन के उद्देश्यों के बारे में बताया कि राज्य की प्रशासनिक इकाईयों यथा संभाग, जिला, उपखण्ड, तहसील, विकासखण्ड का आवश्यकता होने पर युक्तियुक्तकरण या परिसीमन किया जाना है। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों से कहा कि प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन हेतु प्रस्ताव नागरिकों की सुविधाओं, जनअपेक्षाओं को केन्द्र में रखकर तथा क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या, मूलभूत सुविधाओं आदि को ध्यान में रखकर और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर बनाए जाएं। उन्होंने कहा कि परिसीमन अनिवार्य नहीं है, यदि परिसीमन की आवश्यकता नहीं है तो परिसीमन नहीं भी किया जाएगा।
आयोग के सदस्य श्री शुक्ला ने बताया कि नवीन प्रशासनिक इकाई के लिए मार्गदर्शन सिद्धांत बनाए गए हैं। वर्तमान में ऐसे कई तहसील एवं ब्लॉक तथा ग्राम पंचायत है जो जिला मुख्यालय से दूर है लेकिन दूसरे अन्य जिले के समीप है। ऐसे प्रशासनिक इकाइयों में परिवर्तन किया जा सकता है। प्रत्येक जिले के कलेक्टर को जनप्रतिनिधि एवं आम जनता सुझाव देगी कि निर्धारण कहां पर किस मान किया जाना उचित रहेगा। कलेक्टर उसे अपडेट करेंगे। प्रश्नावली को पब्लिक डोमेन में लाकर उसके जवाब तैयार कर सुझाव दिए जाएंगे, जिसकी समीक्षा राज्य स्तर पर की जाएगी।
कई बार कुछ जगह पर जनसंख्या ज्यादा रहती है एवं औद्योगिक विकास भी है लेकिन हम उसे तहसील या जिला का दर्जा नहीं दे सके हैं या घोषित नहीं कर सके हैं तो नए प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन में यह सभी बातें शामिल की जाएगी। आयोग के सदस्य श्री शुक्ल ने स्पष्ट किया कि जिले की समस्त तहसीलों एवं अनुविभागों की बैठक के उपरांत कलेक्टर अपने स्तर पर अधीनस्थों से प्राप्त प्रस्ताव पर युक्ति युक्तिकरण पर वृहद चर्चा कर उस प्रस्ताव को अंतिम रूप से तैयार कर एवं प्रश्नावली को अदयतन कर आयोग को भेजेंगे। सदस्य श्री शुक्ल ने बताया कि कलेक्टर अपने प्रस्ताव तैयार करते समय जनप्रतिनिधि की राय भी लेंगे एवं पूर्व में किसी प्रशासनिक इकाई के युक्ति युक्तिकरण में यदि कोई आवेदन या मांग पत्र आया हो तो जिला स्तर पर लंबित हो तो उसे भी कलेक्टर विचार में लेंगे। यह भी स्पष्ट किया कि यदि परिवर्तन या युक्ति युक्ति करण विलोपन, नवीन सृजन, आवश्यक नहीं है तो ना किया जाए लेकिन यदि कोई मांग इस संबंध में पूर्व से जन सामान्य की ओर से चली आ रही है तो उस पर विचार कर उसे मांग का परीक्षण आवश्यक कर लिया जाए। जिला स्तर पर सभी विभागों के जिलाधिकारी से भी चर्चा की जाए ताकि उनके विभागों की कार्य प्रणाली का भी मत आ सके। इन प्रस्ताव में मानव संसाधन की दक्षता या प्रशिक्षण या संस्थागत ढांचे की आवश्यकताओं पर भी विचार किया जाएगा। कलेक्टर समीक्षा उपरांत जिले का एक अंतिम प्रस्ताव बनाकर प्रश्नावली को अद्यतन करेंगे। बैठक के अंत में आयोग के सदस्यों ने उपस्थित अधिकारियों से सुझाव भी लिए।

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