तीन साल बीतने के बाद भी रैन बसेरा अधूरा। लावारिस फुटपाथ पर करते हैं बसर

नसीम खान संपादक
सांची,,, विकास की बड़ी बड़ी बाते तब धराशाई हो जाती है जब नगर परिषद जोर शोर से विकास का बीड़ा उठाती है परन्तु अधूरा छोड़ उसे भूला देती है जिससे लोगों को सुविधा के नाम पर खुलेआसममान के नीचे फुटपाथों पर जीवन गुजारने मजबूर होना पड़ता है ।
जानकारी के अनुसार बड़े जोर शोर से इस स्थल पर अनाथ लावारिस हालत में नगर में घूमने वाले लोगों को सुविधा उपलब्ध हो सके । नगर परिषद ने आनन-फानन में लाखों रुपए की लागत से बसस्टेंड परिसर में रैन बसेरा निर्माण शुरू किया था तथा आनन फानन में इस रैन-बसेरा निर्माण की जद में आने वाले छोटे मोटे दुकान दार जो अपने छोटे कारोबार चलाकर अपने व अपने परिवार की जीवन की गाड़ी चला रहे थे कि रैन-बसेरा निर्माण के नाम पर इनकी दुकानों की तोड़फोड़ कर डाली जिससे दुकानदारों को खासी परेशानी उठानी पड़ी तथा आनन-फानन में निर्माण जोर शोर से शुरू कर दिया गया जिससे उम्मीद जगी थी कि इस स्थल पर लावारिस हालत में तथा बाहरी लोगों को जिन्हें ठहरने का कहीं ठिकाना नहीं मिलता वह आसानी से इस रैन-बसेरा में ठहरकर रात गुजार सकें तथा यहां वहां भटकने वाले लावारिस तथा लाचार मजबूर लोगों को ठहरने का ठिकाना मिल सके परन्तु तीन साल गुजरने के बाद भी लावारिस लाचार लोग आज भी नगर के फुटपाथ पर खुलेआसममान के नीचे ठंड से सिकुड़ते दिखाई दे जाते हैं परन्तु इनके लिए निर्मित होने वाला रैन-बसेरा मात्र फाउंडेशन तक ही सिमट कर रह गया इस रैन-बसेरा स्थल पर ही एक पेयजलापूर्ति का ट्यूबवेल लगा हुआ है जिससे नगर में पेयजलापूर्ति व्यवस्था जुटाई जाती है यहां गंदगी के अंबार तो लगे ही है बल्कि निर्माणाधीन रैन-बसेरा भी गंदगी से पुरने की कगार पर पहुंच गया है तथा पेयजलापूर्ति हेतु ट्यूबवेल भी पूरी तरह गंदगी की जकड़न में समा गया है इसी तरह गंदगी होती रही तो निर्मित रैन-बसेरा गुम होने से इंकार नहीं किया जा सकता तथा गंदगी के कारण लोगों ने इस ट्यूबवेल के समीप ही खुले में बाथरूम करना शुरू कर दिया है जिससे ट्यूबवेल पूरी तरह गंदगी में जकड़ा गया है तथा लोगों को पेयजलापूर्ति के रूप में नगर परिषद बीमारी परोसने में पीछे नहीं दिखाई दे रही है वैसे भी नगर में इन दिनों विभिन्न बीमारियों ने अपने पांव पसार लिए हैं इससे और अधिक बीमारी फैलने का खतरा मंडराता नजर आ रहा है इस ओर न तो किसी बड़ी बड़ी बाते करने वाले जनप्रतिनिधियों न ही स्थानीय प्रशासन में बैठे जिम्मेदारों को ही सुध लेने की फुर्सत मिल पा रही है जिससे दुकानदारों में भी रोष बढ़ रहा है हालांकि ऐसा भी नहीं है कि नगर परिषद में बैठे जिम्मेदार इन सब से बेखबर हो बावजूद इसके इस अधूरे पड़े रैन-बसेरा की सुध किसी को नहीं हो पा रही है जिसका खामियाजा इसके निर्माण होने के इंतजार में खुलेआम फुटपाथ पर दिन गुजार कर भुगतना पड़ रहा है।

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