नसीम खान संपादक
सांची ,,, वैसे तो इस स्थल की कमान नगर परिषद के हाथों में चल रही है परन्तु इस स्थल की तमाम व्यवस्था तहस-नहस हो कर रह गई है तथा परिषद की आपसी खींचतान भी किसी से छिपी नहीं रही जिससे विकास तो दूर की बात रहा परन्तु जो व्यवस्था सुचारू बनाई जानी थी वह पूरी तरह चरमरा गई है ।
जानकारी के अनुसार यह स्थल वैसे तो विश्व विख्यात पर्यटक स्थल माना जाता है इस स्थल के विकास की जिम्मेदारी स्थानीय निर्वाचित परिषद को सौपी गई थी परन्तु इस स्थल के अनुरूप इसे ढाला नहीं जा सका तथा व्यवसाय पूरी तरह चरमरा गई है । बताया जाता है कि नगर की परिषद जबकि एक ही दल की है बावजूद इसके दो गुटों में बंटी दिखाई देती है तथा इस परिषद की आपसी खींचतान के चलते विकास तो पूरी तरह चरमरा गया है साथ ही नगर को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं का भी टोटा आ चुका है जबकि बताया जाता है परिषद के मुखिया स्वास्थ्य मंत्री डॉ प्रभूराम चौधरी के करीबी माने जाते हैं तब इस हालत में विकास चरम पर किया जाना था परन्तु इस स्थल की परिषद की खींचतान किसी से छिपी नहीं रही ।इस खींचतान की भेंट तमाम विकास की बलि चढ़ गई ।इस परिषद की आपसी खींचतान व तानाशाही रवैए के चलते पहले परिषद की बैठक में तीन कर्मचारी रोजगार से हाथ धोना पड़ा । तथा इस मामले में यहां पदस्थ एक बाबू द्वारा परिषद के प्रस्ताव में कांट-छांट कर दी गई थी बताया जाता है यह बाबू लगभग पच्चीस साल से यही अपनी राजनीतिक ऊंची पकड़ के चलते जड़ जमा रखी है इस मामले में कलेक्टर की जांच में भी परिषद प्रस्ताव से छेड़छाड़ करना पाई गई बावजूद इसके इस ऊंची पकड़ वाले का न तो शासन कुछ बिगाड़ सका न ही प्रशासन ही कुछ नतीजे पर पहुंच सका । इसके बाद प्रदेश भर में कर्मचारियों ने अपनी मांगों को मुख्यमंत्री से मनवाने हड़ताल की थी हालांकि अनेक स्थानों पर मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों की मांग को माना भी परन्तु अपनी मांगों को उठाने का खामियाजा तब भुगतना पड़ा जब बाइस कर्मचारियों को सेवा में वापस ले लिया गया तथा दस कर्मचारियों को चेतावनी पत्र देने के नाम पर बाहर का रास्ता दिखाकर बेरोजगार कर दिया गया तबसे ही कर्मचारी यहां वहां भटकने पर मजबूर हो चुके हैं तथा इस स्थल की नगर परिषद में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा नगर में चर्चा तो यहां तक चल रही है कि परिषद की आपसी खींचतान तथा प्रशासनिक अधिकारियों से भी परिषद की पटरी न बैठ पाना बाजार में चर्चित हो रही है ।इसका खामियाजा लोगों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित होकर भुगतना पड़ रहा है नगर में जगह जगह गंदगी ने अपने पांव पसार लिए हैं तो दूसरी ओर नगर में स्ट्रीट लाइट दिन भर जलती है तथा रात में अंधेरे की चपेट में आ जाती है जिससे बिजली का भार लोगों पर पड़ रहा है हालांकि समय समय पर इस परिषद के कारनामे सुनने देखने को मिलते रहे परन्तु सत्ता पक्ष की परिषद होने के कारण इन कारनामों को उजागर करने प्रशासन पूरी तरह दूरी बनाए रहा । जिससे लोगों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है जबकि इस स्थल पर हर मकान मालिक को विभिन्न करो के रूप में हजारों रुपए प्रशासन को देना पड़ते हैं बावजूद इसके सुविधा के नाम पर लोगों को ही परेशानी उठानी पड़ती है । तब आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस विश्व विख्यात पर्यटक स्थल का विकास भगवान भरोसे होकर रह गया है ।






