विधायक डॉ चौधरी ने ग्राम धनियाखेड़ी में एक बगिया मॉ के नाम परियोजना के तहत रोपित किए फलदार पौधे

नसीमखान


स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को समृद्ध बनाने निजी भूमि पर लगाई जा रही है फलोद्यान की बगिया
जिले में 768 दीदियों की निजी भूमि पर स्थापित होगी फलोद्यान की बगिया

रायसेन,
रायसेन जिले के गैरतगंज जनपद के ग्राम धनियाखेड़ी में विधायक डॉ प्रभुराम चौधरी ने एक बगिया मॉ के नाम परियोजना के तहत हितग्राही श्रीमती सरोज बाई की कृषि भूमि पर आम के पौधे रोपित किए। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, कलेक्टर श्री अरूण कुमार विश्वकर्मा, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती अंजू पवन भदौरिया, डीएफओ श्रीमती प्रतिभा पटेल द्वारा भी फलदार पौधे रोपित किए गए। प्रदेश सरकार द्वारा स्व-सहायता समूह की महिलाओं को समृद्ध बनाने के लिए एक बगिया मॉ के नाम परियोजना शुरू की गई है जिसमें स्व-सहायता समूह की महिलाओं की निजी भूमि पर फलोद्यान की बगिया लगाई जा रही है।
जिला पंचायत सीईओ श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने बताया कि महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत एक बगिया मॉ के नाम परियोजना के तहत स्व-सहायता समूहों की महिलाओं की निजी भूमि पर फलोद्यान की बगिया हेतु पौधे रोपित किए जा रहे हैं। ग्राम धनियाखेड़ी में लवकुश स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती सरोज बाई की आधा एकड़ कृषि भूमि पर आम, अमरूद तथा कटहल के पौधे रोपित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिले में स्व-सहायता समूहों की 700 दीदियों की निजी कृषि भूमि पर फलोद्यान की बगिया लगाने का लक्ष्य प्राप्त हुआ है, जिसके विरूद्ध अभी 768 दीदियों की निजी कृषि भूमि पर फलोद्यान की बगिया लगाई जा रही है।
परियोजना के तहत शासन द्वारा हितग्राहियों को पौधे, खाद, गड्ढे खोदने के साथ ही पौधों की सुरक्षा के लिए कटीले तार की फेंसिंग और सिंचाई के लिए जल कुंड निर्माण हेतु राशि प्रदान की जा रही है। प्रदेश में पहली बार अत्याधुनिक तकनीक से पौधरोपण का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए सिपरी सॉफ्टवेयर की मदद ली जा रही है। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से पौधरोपण के लिए जमीन का चयन वैज्ञानिक पद्धति (सिपरी सॉफ्टवेयर) के माध्यम से किया गया है। जमीन चिन्हित होने के बाद सॉफ्टवेयर की मदद से ही भूमि का परीक्षण किया गया है। जलवायु के साथ ही किस जमीन पर कौन सा फलदार पौधा उपयोगी है, पौधा कब और किस समय लगाया जाएगा, पौधों की सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी कहाँ पर उपलब्ध है, यह सब वैज्ञानिक पद्धति (सिपरी सॉफ्टवेयर) के माध्यम से पता लगाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि एक बगिया मां के नाम परियोजना का लाभ लेने के लिए चयनित हुई समूह की महिला के पास बगिया लगाने के लिए भूमि की सीमा भी निर्धारित की गई है। चयनित महिला के पास न्यूनतम 0.5 या अधिकतम एक एकड़ जमीन होना अनिवार्य है। फलोद्यान की बगिया लगाने के लिए चयनित हितग्राहियों की सहायता के लिए कृषि सखी की तैनाती की जाएगी। ये कृषि सखी हितग्राहियों को खाद, पानी, कीटों की रोकथाम, जैविक खाद, जैविक कीटनाशक तैयार करने और अंतरवर्तीय फसलों की खेती के बारे में जानकारी प्रदान करेंगी। ड्रोन-सैटेलाइट इमेज और डैशबोर्ड से निगरानी पौधरोपण का कार्य सही ढंग से हो रहा है या नहीं, पौधे कहाँ लगे हैं, कहाँ नहीं लगे, इसकी ड्रोन-सैटेलाइट इमेज से बकायदा निगरानी भी की जाएगी। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, गैरतगंज जनपद सीईओ तथा अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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