वर्षों पुराने रेशमकेंद्र का अस्तित्व खत्म होने की कगार पर ।
बर्बादी झेलने पर मजबूर रेशमकेंद्र

नसीम खान संपादक
सांची,,, इस विश्व विख्यात स्थल पर वर्षों से रेशम केंद्र अस्तित्व में आया था तथा वर्षों इस केंद्र पर शहतूत के पौधे उगाकर उसकी पत्ती से रेशम कीड़े पाले जाते थे तथा उसके लावे से रेशम तैयार किया जाता था। तथा इस रेशम प्रक्रिया को देखने समझने स्कूल कालेज के छात्र तो आते ही थे बल्कि यह केंद्र यहां आने वाले देशी विदेशी पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित करता था जिससे पर्यटक भी रेशम प्रक्रिया को देखते हुए समझने का प्रयास कर लेते थे परन्तु कुछ सालों से इस रेशम केंद्र की देखरेख के अभाव में हालत खस्ता हो चुकी है न ही यहां कोई अधिकारी ने ही कोई कर्मचारी ही है सुंदर दिखाई देने वाला केंद्र पूरी तरह उजड़ चुका है ।


जानकारी के अनुसार इस नगर में वर्षों पूर्व मप्र रेशम संचालनालय मप्र सिल्क फेडरेशन प्राकृत एवं प्राकृतिक उपहार के रूप में रेशम केंद्र को अस्तित्व में लाया गया था तथा इस केंद्र पर रेशम आधिकारी कर्मचारी रात दिन रहकर यहां शहतूत के पौधे लगाकर उसके पत्ते खिलाकर रेशम कीड़े पालने की प्रक्रिया किया करते थे जिससे रेशम तैयार किया जाता था परन्तु कुछ सालों से इस केंद्र की जिम्मेदारी से अधिकारी कर्मचारियों ने अपना पल्ला झाड़ लिया तथा मात्र एक ही कर्मचारी वह भी जो दैनिक वेतनभोगी के रूप में रहता था उसे छोडा गया था परन्तु वह कर्मचारी भी नदारद हो गया तब इस रेशम केंद्र की हालत भगवान भरोसे होकर तहसनहस हो गई एवं यहां बने कर्मचारियों के भवन ढहने की कगार पर पहुंच गए तथा जो कार्यालय हुआ करता था उसमें ताला लगाकर जिम्मेदार लगभग पीछा छुड़ा बैठे तथा यहां लगे शहतूत के पौधे जिन्हें बड़ी मशक्कत से बडा किया जाता था वह पानी के अभाव में सूखे पड गये इसके साथ ही यह केंद्र आवारा पशुओं का अड्डा बन बैठा इतना ही नहीं इस केंद्र पर स्थित वह भवन जिसमें रेशमी कीड़े पाले जाते थे जिसमें उनकी प्रक्रिया होती थी तथा रेशम तैयार की जाती थी

जिससे रेशमी कपड़ा तैयार कर देशभर में भेजा जाता था अनेक बार इस की प्रशंसा भी हुआ करती थी परन्तु समय के साथ यह केंद्र अपनी पहचान खोता चला गया तथा अब अधिकारी कर्मचारियों ने भी इसका साथ छोड़ दिया एवं यह बर्बाद होने की कगार पर आ खड़ा हुआ इस केंद्र में आवारा पशुओं के साथ ही असामाजिक तत्वों की नजर पड़ गई जिससे वह भवन जिसमें रेशम के कीड़े पाले जाते थे उस भवन का कुंदा तक उखडा दिखाई देने लगा तथा इस केंद्र का परिसर पूरी तरह कचरे के ढेर में बदल चला । तथा सभी भवन जर्जर हालत में पहुंच गए । हालांकि कुछ अस्पष्ट सूत्रों ने बताया कि इस रेशम केंद्र से विभाग के लोग सभी सामान लेकर जा चुके हैं यदि इस बात पर विश्वास किया जाए तो विभाग की बेशकीमती इस भूमि पर कहीं किसी अन्य विभाग ने हथिया कर कमाई करने की योजना बना डाली है जिससे रेशम केंद्र पूरी तरह इस स्थल से वर्षों पुरानी यादें छोड़ कर अलविदा कह देगा । जैसे इस स्थल से अपनी बेशकीमती भूमि अन्य विभाग को सौंपकर लोनिवि भी भूमि हीन होकर चल पड़ा । खैर जो है इस स्थल पर वर्षों पुराने रेशम केंद्र को पुनः अस्तित्व में लाने सरकार को क़दम उठाने आगे आना होगा जिससे किसानों सहित रेशम विभाग से कुछ बेरोजगारो को रोजगार मिल सके ।

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