मेरे मन में यह था कि बेटी को घर से विदा करना चाहिए तो सामान देकर करना चाहिए। तो कुछ सामग्री का प्रावधान किया। लेकिन उन सामग्री में कई तरह की प्रॉब्लम आ रही है। कई बार अखबार में पढ़ने मिला कि कई चीजें घटिया आ गई।
लेकिन कई बार घटिया ना भी हो तो भी सवाल उठ जाते हैं इसलिए आज मैं बुरहानपुर से तय कर रहा हूं अब सामग्री नहीं देंगे अब सीधे बेटी के हाथ में चेक देंगे ताकि वह जो चाहे वह सामान खरीद ले कहां – कहां देखें अपन कि घटिया साड़ी खरीद ली।
अब यह इंसान नाम का आदमी भी बड़ा कमाल का है मैं सब की बात नहीं कर रहा हूं लेकिन कुछ तो जहां मौका मिल जाए वहीं खा जाएं।
इसलिए अब तय किया है कि चेक दे दें।
बहनों ठीक रहेगा या नहीं…?
सीधे चेक दे दें, जो खरीदना है खरीद लें। अब कौन होते हो तुम हो खरीदने वाले आज से योजना में यह बदलाव कर दिया जाएगा।






