एक तरफ सरकार रोजगार देने की कवायद में जुटी । दूसरी तरफ नगर परिषद में हड़ताली कर्मचारियों के ऊपर लटकी बर्खास्तगी की तलवार।

नसीम खान संपादक लाइव खबर इंडिया पर
मामला सांची नगर परिषद में अपनी मांगों को लेकर बैठे हड़ताली कर्मचारियों का।
सांची,,, नगर परिषद के लगभग 25 सफाई कर्मियों एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों द्वारा अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है बिना मांगों को मानने पर हड़ताल समाप्त करने नगर परिषद के प्रयास असफल साबित हो चुके हैं अब नगर परिषद प्रशासन ने दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी एवं स्थाई कर्मचारियों को 24 घंटे का अल्टिमेटम देने का काम पर लौटने का बीड़ा उठाया है कर्मचारियों के काम पर न लौटने पर 25 कर्मचारियों के ऊपर बर्खास्तगी की तलवार लटक रही है । दूसरी तरफ कर्मचारी भी बर्खास्तगी को दरकिनार करते हुए अपनी हड़ताल जारी रखने पर तुल चुके हैं।
जानकारी के अनुसार नगर परिषद सांची में लगभग 65 कर्मचारी हैं इनमें स्थाई एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी शामिल हैं कर्मचारियों ने बताया कि नगर परिषद प्रशासन हर महीने उनके वेतन से ईपीएफ के नाम पर लाखों रुपए कटौती कर चुके हैं तथा कुछ कर्मचारियों के खाते में राशि जमा की जा चुकी है कुछ कर्मचारियों को अपनी ही राशि लेने नगर परिषद के चक्कर काटना पड़ते हैं हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों में सात कर्मचारी स्थाई है जो अपने समय वेतन मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हुए हैं जबकि 18 कर्मचारी जो दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत हैं इनमें चार वाहन चालक भी शामिल हैं जो बरसों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं अपने विनियमितिकरण की मांग कर रहे हैं परन्तु इन कर्मचारियों के आगे स्थापना व्यय अधिक दिखाकर प्रशासन मांग मानने से साफ इंकार कर रहा है । इस मामले को लेकर आज नगर परिषद की बैठक आयोजित की गई थी इस बैठक में निर्णय लिया गया कि कर्मचारियों को चौबीस घंटे का नोटिस जारी कर काम पर लौटने की चेतावनी देने का निर्णय लिया गया तथा कर्मचारियों के चेतावनी पत्र की अवहेलना करने पर दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को सेवा से पृथक करने तथा स्थाई कर्मचारियों को भी बर्खास्तगी कर नये कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया है । इस हड़ताल से नगर भर गंदगी की चपेट में जकड गया है जिससे समस्या खड़ी हो गई है इस मामले में कर्मचारियों ने बताया कि हम अपने अधिकार के लिए सैकड़ों बार अनुनय-विनय कर चुके हैं परन्तु अधिकारी तानाशाही रवैया अपना रहे हैं तथा न तो स्थाई कर्मचारियों को समय वेतन मान ही दिया जा रहा है न ही रात-दिन अपने काम पर जुटे रहने वाले दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को ही वियनितिकरण का ही लाभ दिया जा रहा है जिससे इस मंहगाई में कर्मचारियों को भरण-पोषण के लाले पड़े हुए हैं । कहने को तो यह नगर परिषद विश्व विख्यात पर्यटक स्थल की कहलाती है परन्तु यह हमेशा अपने कारनामों के लिए चर्चित रही है इसके पूर्व भी तीन दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को अकारण बिना किसी सूचना के अधिकारी कर्मचारियों ने परिषद के पारित प्रस्ताव में कांट-छांट कर सेवा से पृथक कर दिया गया था जो मामला आयुक्त नगरीय प्रशासन विभाग एवं कलेक्टर के संज्ञान में लाया गया था जिसमें कलेक्टर ने पुनः अपनी जांच में कर्मचारियों को सेवा से पृथक करना अवैध मानते हुए कर्मचारियों को बहाल करने के आदेश जारी किए थे ।यह मामला भी काफी चर्चित हुआ था । बावजूद इसके प्रस्ताव में हेर-फेर करने वाले न तो अधिकारी न ही इसमें लिप्त कर्मचारियों पर ही कार्यवाही की जा सकी थी पैंसठ कर्मचारियों की लगभग आठ हजार की आबादी वाली परिषद में लंबी फौज होने के बाद भी स्थापना व्यय अधिक होने का कारण लगभग तीन कर्मचारी टप्पा तहसील में एवं एक कर्मचारी परियोजना अधिकारी कार्यालय में पदस्थ किया गया है जिसके वेतन का भार नगर परिषद प्रशासन को वहन करना पड़ रहा है । तथा एक तरफ चुनावी वर्ष में सरकार रोजगार देने की कवायद में जुटी है तो दूसरी तरफ नगर परिषद प्रशासन सरकार के मंसूबे धराशाई करते दिखाई दे रहे हैं इस मामले में जब सीएमओ हरीश सोनी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की यह हड़ताल नियम विरुद्ध है हमने वर्ष 18 तक के कर्मचारियों का ईपीएफ भुगतान कर दिया गया है इनमें से कोई कर्मचारी छूट भी गये है तो वह खाते अपडेट न होने के कारण रहे हैं हम सभी कर्मचारियों के खाते अपडेट कर रहे हैं तथा शीघ्र ही ईपीएफ भुगतान कर दिया जाएगा तथा समयवेतनमान देने पर भी प्रयास किए जा रहे हैं उन्होंने कहा कि हम हड़ताली कर्मचारियों को नोटिस जारी कर रहे हैं चौबीस घंटे में कर्मचारी काम पर नहीं लौटते हैं तो हम दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को सेवा से पृथक करने की कार्यवाही करेंगे तथा स्थाई कर्मचारियों को भी सेवा से बर्खास्त करने की कार्यवाही की जायेगी ।जब कर्मचारियों को अन्य विभागों में अटैच करने तथा संस्था से वेतन देने से पड़ने वाले भार की ओर ध्यान आकर्षित किया गया तो उन्होंने कहा कि यह शासन जिस कर्मचारी को जहां भी भेजे जाना पड़ता है साथ ही उन्होंने कहा कि हमारे कार्यालय में भी पीएच ई विभाग के कर्मचारी हैं जिन्हें शासन द्वारा भेजा गया है हम काम ले रहे हैं । जबकि इस ऐतिहासिक स्थली की परिषद में लगभग बीस बीस साल से कर्मचारी एक ही जगह तैनात हैं तथा सरकार तक अपनी लंबी पहुंच के चलते जमे हुए हैं । बहरहाल इस मामले में नगर परिषद प्रशासन द्वारा हड़ताली कर्मचारियों पर बर्खास्तगी की तलवार लटक रही है तथा नये कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की भी बात चलने लगी है कहीं न कहीं कर्मचारियों को अपने हक़ की लड़ाई पर प्रशासन भारी पड़ता दिखाई दे रहा है । जबकि शासन कर्मचारियों के हित में कवायद में जुट गया है तो प्रशासन शासन की इस चुनावी वर्ष में मंशा पर पानी फेरता दिखाई दे रहा है ।

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