जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़
संवाददाता, दिलेश्वर चौहान
के एस के पावर प्लांट प्रबंधक के आश्वासन से बसंतपुर के किसानो की 30 एकड़ जमीनों को अधिग्रहण कर बैराज डैम बनाया गया ,ताकि वर्धा पावर प्लांट के लिए पानी सप्लाई की जा सके ।
मगर किसनो की जमीनों की उचित मुआवजा स्कूल, नल पानी, और नदी आने के लिए रोड बना कर देने की बात कही गई थी ।
मगर अभी तक इस दिशा में केएसके पावर प्लांट के प्रबंधक के द्वारा कोई ठोस निर्णय नहीं लिया।
अब जबकि 13 साल गुजर जाने के बाद किसानों की उम्मीद टूट चुकी है
वह अब गेट के सामने बसंतपुर बैराज में पानी सप्लाई बंद कर धरने पर बैठ गए हैं। गांव की दुर्दशा इतनी है कि यहां बच्चों के लिए क्रिकेट मैदान तो क्या जलने के लिए मुर्दे को जमीन भी नहीं बची। और नहीं नदी में आने-जाने के लिए रास्ता दे रही है इन गरीब किसान लोगों की नदी में आगमन बंद होने से अपने ही गांव में पराऐ बन गए हैं। इन जमीनों पर कभी यह सब्जी आकार जिंदगी जीते थे और इन नदी के किनारे रेट पर तरबूज ककड़ी उगा कर पेट पालते थे, इस गांव में 40 पर्सेंट लोग मछुआरे माझी सैकड़ो की तादाद में यहां नाव है जिससे वह मछली पकड़ कर जिवका पारजन करते थे। आज उनके जीवन पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। उनकी हालत ,बद से बत्तर, हो गई है। उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं, कुछ स्थान या नेताओं के द्वारा जरूर इस पर किसानों के हित में आवाज उठाई गई मगर शासन प्रशासन कंपनी वालों के आगे दब गई जिससे वह लाचार और बेबस हो चुके हैं।
आज अध्यक्ष ज्योति नोरगे महामंत्री कमलेश राठौर, संरक्षक सत्य प्रकाश निर्मलकर जी एवं ग्रामीण भारी तादाद में उपस्थित होकर मांगे पूरी नहीं होने पर अनिश्चित कालीन धरना पर बैठे हैं ।
और पानी सप्लाई पावर प्लांट के लिए,
बंद कर दी गई है।
अब देखते हैं कि पावर प्लांट प्रबंधन और ग्रामीण किसानों के बीच क्या निर्णय होता है।
धरने में गांव के किसान लीलाराम पटेल, गणपत यादव, रामदीन, चंपालाल पटेल, किशोरी लाल पटेल, मिलाप रामपटेल, खीर बाई, रामलाल पटेल सुशीला बाई चौहान, धनेश्वरी बाई मांझी, मंटोरी पटेल, गौरी बाई पटेल, श्याम बाई पटेल एवं भारी संख्या गांव के किसान करने में बैठे हैं।






